भोपाल

योग पर आयोजित ऑनलाइन बेवीनार का हुआ समापन

 

 

सगार

स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय,योग विज्ञान विभाग द्वारा दो दिवसीय वेबीनार "महामारी का समय और योग" विषय पर हो रहे बेवीनार का हुआ समापन, कार्यक्रम के प्रथम दिन की मुख्य अतिथि समाजसेवीका स्वच्छ भारत अभियान की ब्रांड एंबेसडर डॉ. नंदिता पाठक जी रही जिन्होंने कहा कि योग हमारी भारतीय परंपरा है जो हमें इस महामारी के समय में बचा सकती है, योग करने वाले लोगों का इम्यून सिस्टम बहुत मजबूत होता है और वह हमेशा सभी बीमारियों से बचे रहते, दूसरे दिन के मुख्य अतिथि वाइस चेयरमैन (एम.जी.एन.सी.आर.ई.)एचआरडी मिनिस्ट्री भारत सरकार से डॉ.भरत पाठक जी रहे जिन्होंने कहा कि प्राचीन समय में हमारे सभी पूर्वज योगी थे योग हमारे पूर्वजों की हमें विरासत है एक स्वस्थ और शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करने के लिए भारत के लिए पूर्वजों की देन है, दूसरे दिन के कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एसोसिएट प्रोफेसर हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी से डॉ. अरुण कुमार सिंह रहे जिन्होंने योग की बारीकियों को बतलाते हुए कहा योग को लेकर के अभी कोई वैक्सीन नहीं बनी है,महामारी से लड़ने की दवाई आपके शरीर में ही है,आपकी इम्यूनिटी, अगर हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत रहेगा तो हम हमेशा रोगों से बचे रह सकते हैं और योग हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है, संस्था के कुलाधिपति डॉ.अजय तिवारी जी ने कहा समय-समय पर योग के ऐसे सेमिनार होते रहने चाहिए आज समय योग को अपनाने का है, खुद से जुड़ने का है खुद को मजबूत करने का है, तभी हम इस महामारी के समय में अपने आप को तनाव मुक्त और स्वस्थ रख सकते हैं, संस्था के प्रबंध निदेशक डॉ.अनिल तिवारी जी ने कहा विश्व पटल पर यह महामारी बढ़ती जा रही है भारत दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में अभी अच्छी स्थिति में लेकिन हमें ऐसे ही सरकार के द्वारा बताए गए नियमों का पालन करते हुए योग करते हुए आयुर्वेद को अपनाते हुए अपने आप को स्वस्थ भी रखना है और भारत को इस कोरोना नाम की बीमारी से मुक्त भी करना है,इसके अलावा डायरेक्टर मनीष कुमार दुबे ने भी अपने विचार रखे, इस पूरे कार्यक्रम का संयोजन कर रहे योग विज्ञान विभाग के विभाग अध्यक्ष गगन सिंह ठाकुर ने बताया कि इस दो दिवसीय बेवीनर में बॉलीवुड की हस्तियों में विनोद जयवंत जी लेकर से लेकर डॉक्टर्स, प्रोफेसर और अलग अलग राज्यो से स्टूडेंट शामिल हुए, कार्यक्रम का आभार कुलपति डॉ.राजेश दुबे जी ने माना।।

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