देश

लॉकडाउन लागू नहीं होता तो एक लाख तक हो सकते थे कोविड-19 मरीज : सरकार

 
नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया। तीन सप्ताह के लिए घोषित लॉकडाउन की मियाद 14 अप्रैल को पूरी हो रही थी, लेकिन इसे बढ़ाकर 3 मई कर दिया गया। केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों ने भी माना कि लॉकडाउन का सकारात्मक असर हो रहा है और इससे कोरोना को खास क्षेत्र तक सीमित रखने में मदद मिल रही है।

लॉकडाउन के असर पर अलग-अलग दावे
इस बीच बार-बार यह दावे भी किए जा रहे हैं कि लॉकडाउन नहीं होता तो भारत की स्थिति आज बहुत खराब होती, कोविड-19 मरीजों की संख्या आज कई गुना ज्यादा होती। आज भी सरकार ने कहा कि अगर लॉकडाउन लागू नहीं किया जाता तो आज भारत में 1 लाख लोगों तक कोरोना वायरस का संक्रमण पहुंच गया होता। यानी, मौजूदा 23 हजार की संख्या के 4 गुना से ज्यादा। हालांकि, 11 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि 15 अप्रैल तक आंकड़ा 8.2 लाख होता। उस दिन देश में महज 7,447 कोरोना मरीज थे।
 
1 लाख होते कोविड मरीज: सरकार
कोरोना संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से बनाए गए पहले एंपावर्ड ग्रुप के चेयरमैन और नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि लॉकडाउन ने कोरोना मरीजों की संख्या दोगुनी होने की रफ्तार भी थाम ली। उन्होंने कहा, 'हमारा विश्लेषण कहता है कि कोविड-19 मरीजों की संख्या दोगुनी होनी की दर घटाने के लिहाज से लॉकडाउन काफी असरदार रहा।' उन्होंने आगे कहा, 'लॉकडाउन लागू नहीं किया जाता तो कोविड-19 के मामले एक लाख तक हो सकते थे, लेकिन भारत में अभी यह महामारी नियंत्रण में है।'
 
पहले कहा था, 8.2 लाख होते मरीज
अब 11 अप्रैल को स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अगरवाल के उस बयान को याद कीजिए जब उन्होंने कहा था कि अगर लॉकडाउन नहीं होता तो 15 अप्रैल तक भारत में कोविड मरीजों की संख्या 8 लाख 20 तक पहुंच सकती थी। उन्होंने एक ग्राफ के जरिए यह अनुमान पेश किया था। अब 12 दिन बाद कहा जा रहा है कि 24 अप्रैल तक 1 लाख कोरोना मरीज होते। अब सोचना यह है कि अगर 15 अप्रैल तक ही 8.2 लाख मरीज होते तो 24 अप्रैल तक 1 लाख ही होने का अनुमान किस आधार पर जताया जा रहा है? दोनों अनुमान तो सही नहीं हो सकते।
 
98% शहरी भारतीय मानते हैं, लॉकडाउन से रुका कोरोना
बहरहाल, सरकार और एक्सपर्ट के इतर आम लोगों का भी मानना है कि लॉकडाउन के कारण भारत में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने की रफ्तार पर बहुत हद तक काबू पाया जा सका है। मार्केट रिसर्च कंपनी TRA ने एक सर्वे में बताया कि शहरों में रहने वाले 98% भारतीय मानते हैं कि लॉकडाउन का जबर्दस्त सकारात्मक असर हुआ है। उनका मानना है कि कोरोना संकट से निपटने की रणनीति अच्छी रही और उसका असर भी बढ़िया रहा।

अभी कैसी है देश की हालत
बहरहाल, देश में कोरोना संक्रमण की वजह से अब तक 723 लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, इस समय देश में कोरोना के 23,452 पॉजिटिव मामले हैं जिनमें से 1,7915 ऐक्टिव केस है जबकि 4,813 मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। अच्छी बात यह है कि मरीजों की संख्या दोगुनी होने में ज्यादा दिन लग रहे हैं। यानी, कोरोना के संक्रमण की रफ्तार थमी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कोविड-19 मरीजों की संख्या दोगुनी होने में 10 दिन का वक्त लग रहा है।