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आपको झकझोर देगी आयुष्मान खुराना की ये कविता

 

मौजूदा दौर में बॉलिवुड के सबसे चहेते स्टार आयुष्मान खुराना कोरोना वायरस के इस माहौल में काफी संजीदा कविताएं कर रहे हैं। आप उनके इंस्टा पर टहल आइए आपको एक से बढ़कर एक खूबसूरत कविताएं मिल जाएंगी। एक ऐसे समय में जबकि लॉकडाउन के कारण लोग घरों में कैद सरीखे हैं, आयुष्मान की ये कविताएं सोचने पर मजबूर करती हैं। खुद के भीतर गहरे झांकने के लिए संकेत करती हैं।

लॉकडाउन के इस माहौल में जब आयुष्मान खुराना यह कविता लिखते हैं, 'हमको तो सिर्फ घर पर रहना है…लड़ना उनको है, उन्हीं को सबकुछ सहना है'…तो यकीन मानिए इन पंक्तियों के साथ हम भी आयुष्मान के उन ख्यालों तक पहुंच जाते हैं, जहां से निचोड़कर वह इन शब्दों को कविता का रूप दिए हैं।

समाज को सच्चाई दिखाते हैं
इस कविता में जब आयुष्मान एक जगह कहते हैं, अब जब सब ठीक हो जाएगा तो इन लोगों को इज्जत देना…कोई काम छोटा नहीं होता ये बात अपने पल्ले बांध लेना….। आयुष्मान की ये बातें सुनने में बहुत सामान्य लग सकती हैं। पर, जरा इसकी गहराई में जाइए। एक बेहतर समाज बुनने के लिए यह बंदा किस कदर शब्दों को बुन रहा है, इस हकीकत को समझिए।

'हम हीरो बस नाम के'
जब आप यह हकीकत समझ रहे हैं, उसी वक्त आयुष्मान आगे लिख देते हैं, हम सब बॉलिवुड हीरो हैं बस नाम के…हम बस पैसा दे सकते हैं….। कभी सोचा है खुद के करियर पर इस तरह से कोई सवाल उठाते हुए साफ-साफ दिल की बात कह दे। आयुष्मान कहते हैं। इसीलिए वे सबसे अलग हैं। पूरी कविता इस पोस्ट में है। या फिर इस विडियो के जरिए सुन सकते हैं।

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