विदेश

ट्रंप के बाद ब्रिटेन ने किया मोदी का गुणगान, पैरासिटामॉल के निर्यात से भारत ने हटाया बैन

 
लंदन

कोरोना वायरस जंग में भारत की सक्रियता और मदद की दुनियाभर में सराहना हो रही है। 1.3 अरब जनसंख्या वाला देश अपनी जरूरतों को समझता है फिर भी आगे बढ़कर मित्र देशों को दवाइयों की आपूर्ति कर रहा है ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। इसी नेकदिली की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब ब्रिटेन ने भी तारीफ की है। पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्रंप की अपील को स्वीकार करते हुए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (hydroxychloroquine) टैबलेट के निर्यात से प्रतिबंध हटा दिया था जिसके बाद ट्रंप ने मोदी को महान नेता की संज्ञा दे डाली थी और अब ब्रिटेन भी मोदी का मुरीद होता दिख रहा है। ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन खुद कोरोना वायरस की चपेट में हैं और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
 
उनकी तरफ से भारत में ब्रिटेन की कार्यवाहक उच्चायुक्त जैन थॉम्पसन ने पैरासिटामॉल (paracetamol )के निर्यात को मंजूरी देने पर आभार जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का ब्रिटेन को पैरासिटामॉल के निर्यात की मंजूरी देने पर आभार। कोरोना वायरस से जंग में वैश्विक सहयोग महत्वपूर्ण है। वैश्विक चुनौतियों से अच्छी शक्ति के रूप में ब्रिटेन और भारत का साथ मिलकर लड़ने का ट्रैक रेकॉर्ड रहा है।'

कोरोना वायरस से ब्रिटेन में अब तक 7,178 लोगों की मौत हो चुकी है और 61 हजार से अधिक लोग संक्रमित हैं। जबकि अमेरिका में 4,32,759 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है और 14,770 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। वहीं, भारत की बात करें तो यहां भी मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक 5700 से ज्यादा लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है और 166 लोगों की मौत हो चुकी है।

डोनाल्ड ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ, बताया महान और अच्छे नेता
डोनाल्ड ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ, बताया महान और अच्छे नेता
अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात को मंजूरी देने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महान नेता बताया है। ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी महान हैं और बहुत अच्‍छे हैं। कोरोना वायरस की मार से बेहाल अमेरिका के राष्‍ट्रपति ने कहा कि अमेरिका ने 29 मिलियन दवा की डोज खरीदी है। इसमें से ज्‍यादातर दवा भारत से मिलेगी।

पहले आंखें तरेरी फिर मोदी के मुरीद हुए ट्रंप
उल्लेखनीय है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने डॉक्टरों के हवाले से यह दावा किया था कि ऐंटी मलेरिया टैबलेट हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन नोवेल कोरोना वायरस से लड़ने में कामयाब हो सकता है। वहीं, स्पेन सहित कई यूरोपीय देशों में मरीजों पर इसका प्रयोग भी शुरू कर दिया गया था। तब तक अमेरिका में मामले उतने नहीं बढ़े थे, लेकिन जब अमेरिका पर कोरोना का गंभीर संकट छाया तो ट्रंप ने पीएम मोदी से फोन पर बात के दौरान हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट के निर्यात को मंजूरी देने का आग्रह किया क्योंकि भारत इस दवाई का सबसे बड़ा उत्पादक है।
 
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसके बाद कहा कि हम अपनी जरूरत के बाद ही दवाई का निर्यात करेंगे जिसके बाद ट्रंप बिफर गए है और जवाबी कार्रवाई करने की भी धमकी दे डाली। वहीं, भारत ने जब मानवीय आपदा में सहायता को हाथ बढ़ाते हुए निर्यात से पाबंदी हटाई तो ट्रंप के सुर बदले और उन्होंने कहा, 'साधारण वक्त में दोस्तों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत होती है। एचक्यूसी पर फैसले के लिए भारत औऱ भारत की जनता का आभार। इसे नहीं भूला जाएगा। इस लड़ाई में न सिर्फ भारत बल्कि मानवता की मदद के लिए नरेंद्र मोदी आपके मजबूत नेतृत्व के प्रति आभार जताता हूं।'

पैरासिटामॉल निर्यात रोकने की वजह
भारत ऐसी कई दवाइयों का बड़ा उत्पादक है जिसके अमेरिका और यूरोप बड़े खरीददार हैं जिनमें पैरासिटामॉल और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन शामिल हैं। भारत में जैसे-जैसे केस बढ़ने लगे और विश्व में दवाइयों की कमी होने लगी तो भारत ने इनके निर्यात को सीमित कर दिया। इसकी वजह यह भी थी कि इन दवाइयों को बनाने के लिए माल चीन से मंगाए जाते हैं और चीन में कोरोना केे कारण फैक्टरियां बंद पड़ गई थीं।
 

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