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CM योगी @3: योगी आदित्यनाथ के वो बयान जिन्हें सुनकर लोग हुए हैरान

 
नई दिल्ली 

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अपने तीन साल पूरे करने जा रही है. यह साल इसलिए अहम है क्योंकि यूपी में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि बीजेपी का कोई मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे करेगा. आपको बता दें कि 19 मार्च को योगी आदित्यनाथ को यूपी के सीएम पद की शपथ लिए हुए तीन साल हो जाएंगे. सीएम बनने से पहले योगी आदित्यनाथ की छवि एक कट्टर हिंदू नेता की थी और उनके कई बयान इसी वजह से चर्चा में भी रहे हैं. यूपी की सत्ता संभाल रहे योगी आदित्यनाथ के हाल फिलहाल के भी कई बयान काफी विवादास्पद रहे.

‘कोई मरने आ ही रहा तो जिंदा कहां से हो जाएगा’

योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र के दौरान 19 फरवरी 2020 को सदन में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर लखनऊ में हुई हिंसा और उसमें मारे गए प्रदर्शनकारियों पर अपने ही अंदाज में विपक्ष पर हमला बोला. सीएम के इस बयान पर काफी हंगामा हुआ. मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा, "राजनेता अपनी बेटियों को उनके बीच भेजते हैं जो भारत के खिलाफ नारेबाजी करते हैं. यूपी में दंगा नहीं हुआ अगर कोई मरने के लिए आ ही रहा है वो जिंदा कैसे बचेगा? पुलिस की गोली से कोई नहीं मरा उपद्रवी अपने आप से मरे हैं."

कानपुर में दिया रजाई वाला बयान

योगी आदित्यनाथ ने अभी हाल ही में सीएए को लेकर हो रहे महिलाओं के धरना प्रदर्शन पर ऐसी टिप्पणी की थी जिसने मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक सुर्खियां बटोरी थीं. 22 जनवरी 2020 को सीएम योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में CAA के समर्थन में आयोजित रैली में यह बयान दिया था. उनके इस बयान पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कड़ा एतराज जताया था. योगी आदित्यनाथ ने कहा था, "पुरुष घरों में रजाई में सो रहे हैं और महिलाएं धरने पर बैठी हैं. महिलाएं कहती हैं कि पुरुष बोलते हैं कि अब हम अक्षम हो चुके हैं, आप धरने पर जाकर बैठो."

केजरीवाल को लेकर की विवादित टिप्पणी

लोकसभा चुनाव के दौरान 7 मई 2019 को दिल्ली की एक सीट पर चुनाव प्रचार करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएम अरविंद केजरीवाल पर विवादित टिप्पणी की थी. योगी आदित्यनाथ ने कहा था, "सबसे बड़ा अजूबा दिल्ली के मुख्यमंत्री स्वयं हो गए हैं. पता ही नहीं लगता कि वे मुख्यमंत्री हैं या धरना मंत्री…क्या मुख्यमंत्री को धरने पर बैठना चाहिए. जब कोई सुधरता नहीं है, इसीलिए लोग उसे कहते हैं लतखोर. हर व्यक्ति फिर अपने तरीके से उसका जवाब देता है."
 
अली बनाम बजरंग बली

इसी तरह सीएम योगी आदित्यनाथ ने 10 अप्रैल 2019 को लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मेरठ में एक चुनावी सभा में कहा था कि अगर कांग्रेस-बीएसपी-एसपी को 'अली' पर विश्वास है तो उन्हें भी बजरंगबली पर विश्वास है. योगी के इस बयान की भी बहुत चर्चा हुई थी और विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग तक इसकी शिकायत की थी.

टीवी इंटरव्यू में कही अपराधियों को ठोकने की बात

यूपी की सत्ता संभाले योगी आदित्यनाथ को कुछ ही वक्त हुए थे कि कि 3 जून 2017 को प्रसारित हुए एक टीवी कार्यक्रम में वे कुछ ऐसा बोल गए जिसे लेकर विपक्ष कई बार उन्हें निशाना बनाता रहा, यही नहीं लोकसभा चुनावों में भी सीएम के उस बयान को भी मुद्दा बनाया गया. उस वक्त योगी आदित्यनाथ ने कहा था, "जो इल्लीगल स्लॉटरिंग कर रहे थे, वे बेरोजगार तो होंगे न. लेकिन रोजगार के लिए उनको मजदूरी करनी पड़ेगी, मनरेगा उनके लिए है. वो लोग अगर अपराध करेंगे, ठोक दिए जाएंगे."
 
पश्चिमी यूपी की कश्मीर से तुलना

30 जनवरी 2017 को विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद में आयोजित एक रैली में योगी आदित्यनाथ ने कहा था, जब मैं पश्चिमी यूपी को देखता हूं, तो उसके सामाजिक ढांचे और जनसांख्यिकी देखकर मुझे पछतावा होता है. 19 जनवरी1990 को हिंदुओं को सामूहिक तौर पर कश्मीर से पलायन करना पड़ा था. वहां एक नरसंहार हुआ था, माताओं और बहनों के सम्मान को खुले तौर पर बेआबरू किया गया था. ऐसी ही स्थिति अगर हमने कहीं देखी है तो वह या तो बंगाल में है या पश्चिमी उत्तरप्रदेश.

मदर टेरेसा को ठहराया था ईसाईकरण का जिम्मेदार

20 जुलाई 2016 को यूपी के बस्ती में योगी आदित्यनाथ ने एक कॉलेज परिसर में आयोजित रामकथा कार्यक्रम में मदर टेरेसा को लेकर आपत्तिजनक टिप्णणी की थी. उस वक्त योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से लोकसभा सांसद हुआ करते थे और उनकी छवि कट्टर हिंदू नेता की थी. उन्होंने कहा था, "मदर टेरेसा जैसे लोग कभी भारत का ईसाईकरण करने का काम करते हैं तो कभी फादर बनकर यही लोग हिन्दुओं को दफनाने की साजिश रचते हैं".

हाफिज सईद से की थी शाहरुख खान की तुलना

4 नवंबर 2015 को योगी आदित्यनाथ ने बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान पर हमला बोला था. उन्होंने आतंकवादी हाफिज सईद से 'किंग खान' की तुलना करते हुए कहा कि शाहरुख और हाफिज सईद की भाषा में कोई अंतर नहीं है. योगी आदित्यनाथ ने कहा था, "हाफिज सईद और शाहरुख खान की भाषा में कोई अंतर नहीं है. शाहरुख को यह नहीं भूलना चाहिए कि अगर देश के बहुसंख्यक उनकी फिल्मों का बायकॉट कर दें तो वह दूसरे मुसलमानों की तरह सड़क पर आ जाएंगे".
 

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