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पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर बीसीसीआई के कॉमेंट्री पैनल से बाहर, आईपीएल में कॉमेंट्री को लेकर भी संशय

मुंबई 
खतरनाक कोरोना वायरस से जुड़े मामलों के बढ़ती संख्या के कारण इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के स्थगित होने और साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के शेष दो मैचों के रद्द करने के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के एक अहम निर्णय पर ध्यान नहीं गया। बोर्ड का यह फैसला निश्चित तौर पर पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर के लिए चिंता की बात है। भारत के पूर्व बल्लेबाज और विश्व क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ कमेंटेटरों में शुमार संजय मांजरेकर को बीसीसीआई ने कॉमेंट्री पैनल से हटा दिया है। इस पर ध्यान नहीं गया क्योंकि धर्मशाला में साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहला वनडे मैच बारिश के कारण खेला नहीं गया। वह धर्मशाला में नहीं थे, जबकि सुनील गावसकर, एल शिवरामकृष्णन और मुरली कार्तिक सहित अन्य सभी बीसीसीआई पैनल कमेंटेटर मौजूद थे। 

साल 1996 में अपनी रिटायरमेंट के बाद से मांजरेकर पिछले तीन वर्ल्ड कप और आईसीसी के सभी बड़े टूर्नमेंट के लिए कॉमेंट्री पैनल का हिस्सा थे। माना जा रहा है कि बीसीसीआई उन्हें आईपीएल के कॉमेंट्री पैनल में शामिल नहीं करने की योजना बना रहा है जो लीग 15 अप्रैल की संशोधित तारीख से शुरू हो सकती है। बहुत से लोग इस बात पर टिप्पणी करने को तैयार नहीं थे कि मांजरेकर को इस पैनल से क्यों बाहर किया गया लेकिन बीसीसीआई के एक सूत्र ने पुष्टि की कि 54 वर्षीय मुंबई के पूर्व कप्तान को कॉमेंट्री पैनल से बाहर रखा गया है। सूत्र ने कहा, 'शायद वह आईपीएल पैनल से भी बाहर हो जाएंगे। इस समय यह हमारे दिमाग में नहीं है लेकिन तथ्य यह है कि उनके काम से वे खुश नहीं हैं।' स्रोत ने हालांकि यह नहीं बताया कि 'वे' कौन हैं, लेकिन इसकी उम्मीद कतई नहीं है कि बीसीसीआई के पदाधिकारी इस बात से अनजान होंगे।

बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष सौरभ गांगुली खुद भी बड़े कमेंटेटर हैं और आईसीसी पैनल का हिस्सा भी रहे है। उन्होंने वर्ल्ड कप सहित कई आईसीसी इवेंट में कॉमेंट्री की है। हाल के दिनों में मांजरेकर काफी विवादों में घिरे, जैसे कि रविंद्र जडेजा पर एक टिप्पणी करना और पिछले साल कोलकाता में गुलाबी गेंद टेस्ट टेस्ट के दौरान साथी कमेंटेटर हर्षा भोगले के साथ बहस करना। उन्होंने जडेजा को 'टुकड़ों में प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी' कहा था और जब इस ऑलराउंडर ने शानदार प्रदर्शन किया तो अपनी गलती को स्वीकार किया। जब मांजरेकर से हमारे सहयोगी 'मुंबई मिरर' ने इस बारे में बात करना चाहा तो उन्होंने कॉल और मेसेज का कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने भोगले मुद्दे पर भी अपनी गलती कबूल कर ली थी। 

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