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भवनों को किराए पर देने वाले सर्विस टैक्स के दायरे में आएंगे

 लखनऊ 
शहरों में बड़े-बड़े व्यावसायिक भवनों को बनवाकर उसे किराए पर चलाने वालों को सर्विस टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी है। आयुक्त वाणिज्य कर अमृता सोनी ने इस संबंध में सभी जोन प्रभारियों से इस संबंध में पूरी रिपोर्ट तैयार कराते हुए मुख्यालय को उपलब्ध कराने को कहा है।

उन्होंने जोन प्रभारियों को भेजे पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री की बैठक में टैक्स बढ़ाने के दौरान इन बिंदुओं पर चर्चा हुई थी। इसमें पूछा गया था कि व्यावसायिक भवन बनवाकर उन्हें किराए पर चलवाने वालों से सर्विस टैक्स लेने का क्या प्रावधान है। इसके आधार पर ही आयुक्त वाणिज्य कर ने प्रदेशभर के जोन प्रभारियों को पत्र लिखकर पूछा है कि ऐसे भवन स्वामी जिनके द्वारा अपने भवनों को बड़े-बड़े शोरूम के लिए किराए पर दे दिया गया है क्या उनके द्वारा नियमानुसार सर्विस टैक्स दिया जा रहा है या नहीं।

इस पत्र में कहा गया है कि सप्लाई ऑफ सर्विसेज और सर्विसेज के सप्लायर्स के लिए पंजीकरण कराने की व्यवस्था है। इसके लिए उसे 20 लाख रुपये पंजीकरण शुल्क देना होता है। इसलिए सर्वे करके यह पता लगाया जाए कि उनके यहां करयोग्य व्यावसायिक भवनों की संख्या कितनी है। इसमें कितनों ने पंजीकरण करा रखा है। पंजीकृत व्यक्तियों द्वारा कितना पैसा सालाना जमा किया जा रहा है। व्यवसायिक भवनों में कितने ऐसे जिनके भवन स्वामियों द्वारा पंजीकरण नहीं कराया गया है। वाणिज्य कर मुख्यालय जोन से सूचना मिलने के बाद इस संबंध में विधिक प्रक्रिया के आधार पर ऐसे भवनों को सर्विस टैक्स के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

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