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चीन पर दक्षिण से नजर, ब्रह्मोस से लैस सुखोई की पूरी स्क्वॉड

नई दिल्ली
चीन की चुनौती से निपटने के लिए भारत बंगाल की खाड़ी और रणनीतिक दृष्टि से अहम क्षेत्रों में अचूक हथियारों की तैनाती कर रहा है। भारत दिन और रात दोनों वक्त लंबी दूरी तक मारक क्षमता वाले हथियारों का एक प्लेटफॉर्म बना रहा है ताकि प्रतिद्वंद्वी की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। ये हथियार दुश्मन के एयरक्रॉफ्ट कैरियर और अहम ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं।

लड़ाकू विमान सुखोई का स्क्वॉड्रनएयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने बताया कि वायुसेना तमिलनाडु के तंजावुर में सुखोई का एक स्क्वॉड्रन भी बना रहा है, जो सुपर सोनिक मिसाइल ब्रह्मोस के साथ लैस होंगे। ब्रह्मोस की तैनाती के लिए सुखोई में कुछ बदलाव भी किए जाएंगे। इसके बाद यह लड़ाकू विमान वायुसेना के अभियानों के लिए काफी अहम हो जाएंगे।

अचूक हैं ब्रह्मोस मिसाइल
ब्रह्मोस के डायरेक्टर जनरल सुधीर मिश्रा ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'यह एक तरह से हमारे सपनों के साकार होने के जैसा है। भारतीय वायु सेना समुद्र और जमीन दोनों पर ही लंबी दूरी के बावजूद लक्ष्य पर अचूक वार करने में सक्षम मिसाइलों से लैस करने की कोशिश थी। अब यह सपना पूरा हो रहा है।'

ब्रह्मोस और सुखोई से वायु सेना की नई उड़ान
नए सुखोई स्क्वॉड्रन का नाम टाइगर शार्क्स रखा गया है। तमिलनाडु के तंजावुर एयरबेस में सोमवार को चार से छह फाइटर जेट को बेड़े में शामिल किया जा सकता है। इस साल के अंत तक बेड़े में 18 सुखोई फाइटर जेट शामिल करने की योजना है। सुखोई फाइटर जेट हवा में 1500 किमी. तक मार करने में सक्षम है तो ब्रह्मोस मिसाइल भी 290 किमी. रेंज तक लक्ष्य पर अचूक निशाना साधने की क्षमता से लैस है।

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