भोपाल

राज्य सरकार के पास शहर के भीतर जमीन का टोटा, अब निगम-मंडल की जमीन पर बनेगे गरीबों के आवास

भोपाल
यदि कोई निगम-मंडल और संस्था उन्हें आवंटित जमीन का उपयोग नहीं कर रहे है तो अब यह उनके लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है। राज्य सरकार ऐसी जमीनें वापस लेकर उनपर अब गरीबों के आवास बनाएगी।

प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में गरीबों के लिए बनाए जाने वाले आवासों के लिए राज्य सरकार के पास शहर के भीतर जमीन का टोटा पड़ गया है। इसलिए अब सरकार विभिन्न संस्थाओं, निगम-मंडलों की ऐसी जमीनों की तलाश सरकार कर रही है जिसपर आवंटन के बाद अब तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है। संस्थाओं को जिस काम के लिए जमीन आवंटित की गई थी उस जमीन का उस काम के लिए उपयोग नहीं हो रहा है। जमीन खाली पड़ी है। जमीन अतिरिक्त हो रही है तो ऐसी सभी जमीनें चिन्हित की जाएगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने अपने सभी निगमों के अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिए है कि शहरी क्षेत्रों में ऐसी जमीने चिन्हित करे जो लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी हुई है। उनकी जानकारी वे अपने जिले के कलेक्टर को दें। कलेक्टर शहर में गरीबों के आवास के लिए जमीनों की कमी होने पर इन जमीनो का गरीबों के लिए बनाए जाने वाले आवास के लिए लिए जाने का प्रस्ताव भेजेंगे तो राज्य शासन इन जमीनों को गरीबों के आवास के लिए आवंटित कर उन पर शहर के बीच में गरीबों के आवास बनवाएगी।

नगरीय प्रशासन संचालनालय ने कुल 3 लाख 73 हजार आवासों के लिए पहली किस्त की राशि निकायों को आवंटित की थी लेकिन इसमें केवल 2 लाख 51 हजार आवासों का काम फाउंडेशन, प्लिंथ स्तर तक किया गया है। एक लाख 21 हजार आवासों की कार्य प्रगति कहीं नजर ही नहीं आ रही है। इसको लेकर भी अधिकारियों पर नाराजगी जताई गई है।

नगरीय निकायों को स्वीकृत आवासों के हितग्राहियों को पीएमएव्हाय एमआईएस से अटैच कराने को कहा गया था लेकिन अब तक कुल स्वीकृत 5 लाख 36 हजार आवासों में से केवल 4 लाख 68 हजार हितग्राहियों को ही एमआईएस से अटैच किया गया है। शेष 67 हजार हितग्राहियों को एमआईएस से अटैच करने की कार्यवाही कार्यवाही नहीं की गई है। इसके चलते केन्द्र सरकार से रााशि नहीं मिल पा रही है। नगरीय प्रशासन आयुक्त पी नरहरि ने अगले दस दिन में यह कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए है।

शहरी आवास योजना में गरीबों के आवास के लिए हितग्राहियों से भी मार्जिन मनी प्राप्त करना है लेकिन निकायों के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी इसमें पर्याप्त रुचि नहीं ले रहे है। वर्तमान में बनाए जा रहे 43 हजार आवासों में से केवल 28 हजार हितग्राहियों से ही मार्जिन मनी प्राप्त की गई है। केवल एक हजार 877 आवासों के आधिपत्य दिए गए है। ऐसे आवास जिन पर कार्य प्रगति पर है उनके हितग्राही अंश की प्राप्ति भी काफी कम है। सभी निकाय मिलाकर लगभग नौ सौ करोड़ रुपए प्राप्त होना है और अभी तक केवल 94 करोड़ रुपए प्राप्त हुए है। इसको लेकर नगरीय प्रशासन आयुक्त ने निकायों के अािधकारियों पर नाराजगी जताई है और इस काम में रुचि लेकर तेजी लाने के निर्देश दिए है।

 

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