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अयोध्या के फैसले में 5 में से एक जज ने जोड़े थे 116 पन्ने

 नई दिल्ली 
शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में 5 जजों की संविधानिक पीठ ने दशकों पुराने अयोध्या मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इसके तहत विवादित जमीन को जहां रामलला के मंदिर के लिए सौंप दिया गया है। वहीं मुस्लिम समुदाय को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने की बात कही गई है। पांचों जजों के सर्व-सम्मत से आए 929 पेज के फैसले में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में दावों का विश्लेषण किया गया जिसका शीर्षक विश्वास और आस्था के आधार पर स्थापित नहीं किया जा सकता है। लेकिन बेंच के एक जज के अनुसार विवादित स्थल पर राम मंदिर होने के दस्तावेज और मौखिक साक्ष्य हैं।

जज ने फैसले में 116 पन्नों को जोड़ा है जिसमें हिंदू समुदाय के विश्वास और आस्था की बात की गई है। इसके अनुसार बाबरी मस्जिद ही वह जगह है जहां भगवान राम का जन्म हुआ था और ये इसके दस्तावेज और मौखिक साक्ष्य हैं। न्यायाधीश ने कई मौखिक बयानों, राजपत्रों में राम के जन्म स्थान और यहां तक ​​कि "धर्मग्रंथों और पवित्र धार्मिक पुस्तकों सहित वाल्मीकि रामायण और स्कंद पुराण का उल्लेख किया है, जिसपर विश्वास को आधारहीन नहीं ठहराया जा सकता है"।

70 साल पुरानी अयोध्या भूमि विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिसमें विवादित जमीन राम मंदिर के लिए दी जाएगी जबकि मुस्लिम समुदाय को अन्य स्थान पर मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन दी जाएगी। संविधान पीठ ने अपने 1045 पन्नों के फैसले में कहा कि नयी मस्जिद का निर्माण प्रमुख स्थल पर किया जाना चाहिए। साथ ही उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए जिसके प्रति हिन्दुओं की यह आस्था है कि भगवान राम का जन्म यहीं हुआ था। 

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