भोपाल

पीसीसी चीफ की चर्चाएं जोरों पर, मंत्रियों की मांग-सिंधिया को मिले PCC चीफ की कमान

भोपाल
झाबुआ चुनाव में जीत के बाद एक बार फिर पीसीसी चीफ की चर्चाएं जोरों पर है। भोपाल से दिल्ली तक इसको लेकर सरगर्मियां बढ़ गई है।इसी बीच कमलनाथ सरकार में सिंधिया खेमे के मंत्री भी सक्रिय हो चले है और उन्हें प्रदेश की कमान सौंपने की मांग कर रहे है।मंत्रियों का कहना है कि अगर सिंधिया को कमान मिलती है तो संगठन मजबूत होगा और कार्यकर्ताओं में भी उत्साह बढ़ेगा।वही कांग्रेस के दिग्गज नेता भी इस सस्पेंस को खत्म कर जल्द फैसला करने की मांग कर रहे है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनो में नए पीसीसी चीफ को लेकर फैसला किया जा सकता है।

पशुपालन मंत्री लखन सिंह ने संगठन को कमजोर बताते हुए सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की वकालत की। लाखन सिंह का कहना है कि भले हम सरकार में हों, लेकिन संगठन कमजोर है। इसे मेहनत करके मजबूत करने की जरूरत है। जो भी अध्यक्ष बनेगा उसे मेहनत करना पड़ेगी। वही उन्होंने सिंधिया की वकालत करते हुए कहा कि सिंधिया युवा हैं प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो संगठन में मजबूती आएगी।

वहीं, इंदौर में स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने सिंधिया को राष्ट्रीय नेता बताते हुए जो भी जिम्मेदारी तय की जाएगी तो उसका स्वागत करेंगे। सिलावट ने सिंधिया की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें कभी भी पद की लालसा नहीं है और आला कमान से मिले निर्देश का पालन करने को वो तत्पर है। इसके पहले कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री इमरती देवी कई बार सिंधिया को प्रदेशाध्यक्ष बनाने की मांग कर चुकी है।

वही कांग्रेस के दिग्गज नेता रामनिवास रावत का कहना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास काम ज्यादा है।जिसके चलते कमलनाथ संगठन पर फोकस नहीं कर पा रहे है।15  साल बाद सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार से कार्यकर्ताओं को काफी उम्मीदें है, लेकिन बार बार प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी से कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ने लगी है। उन्होंने मांग की है कि  हाईकमान जल्द ही मप्र के अध्यक्ष का फैसला करें।

दरअसल, लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद से ही प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। दावेदार कई थे लेकिन प्रबल दावेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ही जता रहे थे। उनके समर्थक मंत्री और नेता लगातार उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे थे। लेकिन झाबुआ उपचुनाव के चलते मामला ठंड़ा पड़ गया, लेकिन चुनाव की जीत के बाद एक बार फिर पीसीसी चीफ की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।सुत्रों की माने तो कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में जुटी है, कई फेरबदल भी किये जाने है जो पीसीसी चीफ के फैसले के कारण अटके हुए हैं। संकेत मिल रहे हैं जल्द ही इस पर निर्णय हो सकता है। कहा जा रहा है कि सिंधिया के नाम पर बड़े नेताओं में सहमति बन गई है लेकिन आखिरी फैसला हाईकमान को ही करना है।

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