ग्वालियर

समाज का बैंक पढ़ाई के लिए छात्रों को दे रहा बिना ब्याज का कर्ज

विद्यार्थियों को बैंकों के महंगे शिक्षा ऋण (एजुकेशनल लोन) से बचाने के लिए माथुर वैश्य समाज ने अभिनव प्रयास किया है।

समाज का बैंक पढ़ाई के लिए छात्रों को दे रहा बिना ब्याज का कर्ज

ग्वालियर। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को बैंकों के महंगे शिक्षा ऋण (एजुकेशनल लोन) से बचाने के लिए माथुर वैश्य समाज ने अभिनव प्रयास किया है। समाज के लोगों ने आपसी सहयोग से करीब एक करोड़ रुपए का फंड बनाया है। इससे माथुर वैश्य महासभा द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2013-14 से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए ऋण दिया जा रहा है। उनसे इस कर्ज के लिए कोई ब्याज भी नहीं लिया जाता है। पांच साल में 50 से अधिक बच्चों को पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। इस ऋण की खासियत यह भी है कि विद्यार्थी की नौकरी लगने या उसे रोजगार मिलने के बाद वह इसे किस्तों में चुका सकता है। समाज के होनहार लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए बने इस फंड में समाज के समृद्ध लोगों ने दान किया है। संस्था का मुख्य कार्यालय उप्र के वाराणसी में समाज के ही अशोक गुप्ता के मकान में है।

इस फंड से ऋण पाने के लिए छात्र-छात्राओं को इसी कार्यालय में आवेदन करना होता है। इसके बाद संस्था द्वारा संबंधित शाखा छात्र से जुड़ी जगहों पर उसका विवरण भेजकर उसकी जानकारी एकत्रित करती है। छात्र के वास्तविक जरूरतमंद पाए जाने पर महासभा द्वारा उसकी पढ़ाई की फीस सहित अन्य खर्च के हिसाब से ऋण स्वीकृत करती है।

आठ लाख तक का दिया जाता है कर्ज : महासभा द्वारा छात्र के पाठ्यक्रम और उसकी फीस के आधार पर ऋण स्वीकृत किया जाता है। छात्रों को तीन से लेकर आठ लाख रुपए का ऋण दिया जाता है। छात्रों को कर्ज केवल व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए ही दिया जाता है क्योंकि इसके बाद नौकरी मिलने की उम्मीद अधिक रहती है। साथ ही इनकी फीस भी ज्यादा होती है। उसे भरने में विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नौकरी मिलने पर वेतन की 40 प्रतिशत तक की राशि मासिक किस्त के रूप में ली जा सकती है।

बैंकों की ज्यादा ब्याज दर से परेशानी महसूस करते हैं छात्र

बैंकों द्वारा छात्रों दिए जाने वाले शिक्षा ऋण की ब्याज दर लगभग 15 से 18 प्रतिशत सालाना होती है। इसके कारण यह ऋण काफी महंगा पड़ता है। यही नहीं, विद्यार्थी की पढ़ाई पूरी होते ही बैंक उसकी वसूली शुरू कर देती है, भले ही छात्र की नौकरी लगी हो या नहीं। कई बार छात्र की नौकरी नहीं लग पाती है और किस्त शुरू हो जाने से वह परेशानी और दबाव महसूस करने लगता है।

माथुर वैश्य महासभा की 168 से अधिक लोगों की टीम है। यह टीम सामाजिक क्षेत्रों में किए जाने वाले कार्यों की रूपरेखा तय करती है। इसी आधार पर सामाजिक कार्य किए जाते हैं। विद्यार्थियों को बिना ब्याज के लोन देने का प्रस्ताव भी महासभा की चर्चा के दौरान रखा गया था। – एडवोकेट विजय गुप्ता मंत्री, माथुर वैश्य शाखा सभा, ग्वालियर

माथुर वैश्य महासभा का मैं चार तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहा। मैंने अपने कार्यकाल में 25 से अधिक छात्रों के लोन स्वीकृत किए थे। महासभा में लगातार फंड आता है साथ ही अब छात्र किस्तें जमा करने लगे हैं, इसलिए फंड बढ़ रहा है। नए छात्रों को ऋण दिया जा रहा है। – दर्शनलाल गुप्ता, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय माथुर वैश्य महासभा

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