रायपुर

ये हैं धरमपुर के धनुर्धर, ऐसे तैयार हो रहे हैं इस गांव में ‘बाल अर्जुन’

यहां के कुछ बच्चे तीरंदाजी में रूचि लेकर दस किलोमीटर दूर बिहाझर आश्रम में रविवार अवकाश के दिन धनुर्विद्या सीखने जाते थे।

ये हैं धरमपुर के धनुर्धर, ऐसे तैयार हो रहे हैं इस गांव में 'बाल अर्जुन'

रायपुर। ये हैं दूरस्थ ग्रामीण अंचल के धनुर्धर,जो सुविधाओं के अभाव में एकलव्य की तरह धनुर्विद्या सीख रहे हैं। खेल सुविधाओं के अभाव के बीच इन्हें खेलगढ़िया योजना और अपने गुरूजनों से बड़ी मदद मिली। जिससे तीरंदाज बनने का इनका सपना साकार हो रहा है। महासमुंद जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर बागबाहरा ब्लाक में स्थित है छोटा सा गांव धरमपुर।

यहां के कुछ बच्चे तीरंदाजी में रूचि लेकर दस किलोमीटर दूर बिहाझर आश्रम में रविवार अवकाश के दिन धनुर्विद्या सीखने जाते थे। इस बीच शिक्षकों को इसकी जानकारी मिली। खेलगढ़िया योजना से तीन हजार रुपए सरकारी फंड मिला। इसमें गुरुजनों ने ढाई हजार रुपए अपने वेतन से दिया और साढ़े पांच हजार रुपए खर्च कर मणिपुर से तीरंदाजी का कीट मंगवाया। बाद स्कूल के बच्चों को तीरंदाज बनाने का सिलसिला प्रारंभ हुआ।

जुलाई 2019 में स्कूल खुलते ही शिक्षक रिंकल बग्गा और जनकराम धु्रव ने तीरंदाजी के शौकीन बच्चों को चिन्हांकित किया। हर रविवार को बिहाझर के प्रशिक्षक के पास इन्हें भेजना शुरू किया। सप्ताह में एक दिन प्रशिक्षण और छह दिन खुद से कठिन अभ्यास करके एक बालक वरूण तीरंदाजी में इस कदर पारंगत हुए कि वह 19 अक्टूबर से कोंडागांव में आयोजित राज्यस्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचे हैं।

महज दस साल की उम्र में बालक की अचूक निशानेबाजी से सभी हतप्रभ हैं। गरीब और श्रमिक परिवार में पैदा हुए बालक वरूण को गुरूजनों की मदद और खेलगढ़िया योजना से खेल सामग्री का प्रोत्साहन मिला तो वह प्रथम प्रयास में ही जिला और संभाग स्तरीय स्पर्धाओं से गुजरे हुए अब राज्य स्तर पर अपनी धनुर्विद्या का कौशल दिखा रहे हैं।

22 अक्टूबर तक कोंडागांव में आयोजित स्पर्धा में भाग लेने के बाद यदि यहां चयन हो जाता है तो वे राष्ट्रीय शालेय खेल स्पर्धा में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगे। धनुर्विद्या में जहां बड़े बच्चे पारंगत नहीं हो पाते हैं वहीं प्राथमिक शाला के किसी बच्चे का अंडर-14 आयु वर्ग में राज्य स्तर पर चयन से शिक्षक और गांव के लोग उत्साहित हैं।

इस बच्चे से प्रभावित होकर अन्य बच्चे भी तीरंदाजी की राह पर हैं। शिक्षक भी उत्साहित होकर अगले वर्ष के लिए कार्ययोजना बना रहे हैं। बालिकाओं को भी तीरंदाज बनाने की दिशा में इस गांव में विशेष प्रयास हो रहा है।

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