छत्तीसगढ़

नवरात्र सप्तशती बीज मंत्र साधना का आयोजन 29 से 7 अक्टूबर तक

बिलासपुर । नवरात्रि सप्तशती बीज मंत्र साधना का आयोजन रामेश्वरम शिवालय, इंदिरा विहार, एसईसीएल सीपत रोड, सरकंडा, बंधवापारा के बगल में 29 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक किया जा रहा है। नवरात्रि मां दुर्गा का पर्व होता है और इस समय की गई साधना का अनंत गुना फल होता है। मंदिर में ज्योति कलश की स्थापना की जाती है और मांग का 16 श्रृंगार होता है जो कि हर रोज बदला जाता है। सप्तशती का पाठ वैसे तो कई घरों में किया जाता है पर नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से अन्न, धन, यश, कीर्ति की प्राप्ति होती है। बीज मंत्र साधना अवधूत बाबा शिवानंद की वाणी में होगी। दुर्गा सप्तशती से साधको को लगातार फायदा हो रहा है। इसलिए यह साधना बिलासपुर में हर हफ्ते 4-5 बात अलग जगह पर होती है। 29 सितम्बर को 1.30 दोपहर को साधना होगी, 30 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक 11.30 बजे एवं 6 को 11.00 बजे से होगी और 7 अक्टूबर को 10 बजे से होगी। 7 अक्टूबर को नवमी तिथि में मनोकामना हवन होगा हवन के बाद कन्या पूजन के पश्चात भंडारे का आयोजन किया गया है। यह साधना पूर्णत: निशुल्क है और कोई भी बिना किसी औपचारिकता के भाग ले सकता है। सेवा साधक पुनीत ढंढारिया ने बताया कि दुर्गा सप्तशती शक्ति साधना का सबसे शक्तिशाली ग्रंथ है। जिसकी सारे शक्ति इनके बीज मंत्रों में समायी है जो इसको 700 श£ोक और 13 अध्यायी में है। इन बीज मंत्रों से अथाह शक्ति उत्पन्न होती है और बिना गुरू के इसकी शक्ति को पाना संभव नहीं है। गुरू बंद ग्रंथियां खोलता है जिससे साधक के अंदर शक्ति को सहने की क्षमता आती है। इन बीज मंत्रों की साधना उच्च स्वर में की जाती है, मंत्रोच्चारण के द्वारा वाचिक तय होता है। इन बीजमंत्रों के उच्चारण से हमारे सूक्ष्म शरीर में कर्म के जो बीज अटके हुए हैं, जीके कारन हमको पीड़ा रोग व दोष होता है वह कमजोर पडऩे लगते हैं और रोग कष्ट शरीर को छोडक़र भागने लगते हैं। दुर्गा सप्तशती बीज मंत्रों के अलग-अलग अध्यायों का अपना अपना महत्व है जिनका यदि भक्तिभाव से पाठ किया जाए तो फल बड़ी जल्दी मिलता है। यदि किसी भी जातक को राहू, शनि, मंगल से बुरे फल मिल रहे हो तो ये अध्याय पूरी क्षमता रखते हैं उनके बुरे दोषों को दूर करने में। हर अध्याय का अपना एक महत्व है।

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