मध्य प्रदेश

हरभजन सिंह को सस्‍पेंड करने के लिए महापौर ने कमलनाथ के मंत्री से की बात, ये है वजह

इंदौर. मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के हाई-प्रोफाइल हनी ट्रैप मामले (Honey Trap Case) में फंसे नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह (Engineer Harbhajan Singh) को सस्पेंड करने के लिए इंदौर की महापौर मालिनी गौड़ (Mayor Malini Gaur) ने नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह (Urban Development and Housing Minister Jaivardhan Singh) से फोन पर चर्चा की. महापौर ने कहा कि हमारे यहां अनैतिक काम को समाज कभी भी स्वीकार नहीं करता है और नगर निगम के इंजीनियर ने जो कृत्य किया है वो एक बहुत ही दुखद और शर्मनाक घटना है. मैंने मंत्री जयवर्धन से चर्चा की है और उन्हें सस्पेंड करने के लिए कहा है.

महापौर ने हरभजन सिंह पर लगाए ये आरोप

महापौर ने कहा कि हरभजन की वजह से पूरे नगर निगम की छवि धूमिल हुई है. नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्धन सिंह अब इस मामले में विचार करेंगे कि आगे क्या करना है. 1989 में हरभजन सिंह इंदौर शहर में रीवा से प्रतिनियुक्ति पर आए थे और मेरे समय काल में उन्हें ऐसा कोई कार्य नहीं सौंपा गया. उन्होंने जो भी घपले किए हैं उसकी पूरी जांच होनी चाहिए. हनी ट्रैप मामले में जो भी दोषी हैं, उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. हालांकि ये मामला सामने आने के बाद हरभजन सिंह भी गायब हैं और उनके फोन भी बंद आ रहे हैं.

पद पर काबिज हैं हरभजन

इस मामले में हरभजन सिंह को निलंबित करने की अनुशंसा भले ही महापौर ने कर दी हो, लेकिन हरभजन सिंह अभी निगम में नर्मदा प्रोजेक्ट के मुख्य कार्यपालन यंत्री के पद पर काबिज हैं. उनसे अभी तक विभाग का प्रभार वापस नहीं लिया गया है. यही नहीं, नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई और इस वजह से कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं. आखिर कौन वो लोग हैं जो हरभजन को बचाने में लगे हुए हैं. जबकि महापौर मालिनी गौड़ ने तत्काल निलंबित कर इंदौर से हटाने की मांग नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह से की है.

उधर, हरभजन मामले को लेकर नगर निगम के सभापति, एमआईसी सदस्य, निगम आयुक्त, अपर आयुक्त, उपायुक्त से लेकर कोई भी कर्मचारी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है. हालांकि दबी जुबान में सभी ये जरूर कहते हैं कि हरभजन सिंह के क्रियाकलापों ने कभी भी नगर निगम का नाम ऊंचा नहीं किया. स्वच्छता में तीन बार अव्वल आकर इंदौर नगर निगम ने देश में जो नाम कमाया था उसे हरभजन सिंह के इन क्रियाकलापों ने धूमिल कर दिया है.

कैलाश विजयवर्गीय ने किया था ये काम

बताया जाता है कि तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय भी हरभजन सिंह से काफी खफा थे और उन्होंने बिल्डिंग परमिशन से हरभजन सिंह को हटा दिया था. जबकि हरभजन का विवादों से काफी गहरा ताल्लुक रहा है. इसी के चलते आयुक्त रहे मनीष सिंह ने कभी भी हरभजन सिंह को कोई काम नहीं दिया और ना ही उनको ट्रांसफर लेने दिया. सिंह के जाने के बाद हरभजन सिंह को हाउसिंग फॉर ऑल जैसा मलाईदार विभाग मिल गया. इसके बाद आयुक्त आशीष सिंह ने हरभजन सिंह को वहां से हटाकर नर्मदा प्रोजेक्ट में भेजा था. जबकि पिछले दिनों हरभजन सिंह के कारण ही चिंटू चौकसे के समर्थकों ने नगर निगम के परिषद सम्मेलन में जमकर हंगामा किया था. वह (हरभजन) हमेशा गीत गजलों की महफिल में खोए रहने वाले अधिकारी रहे हैं.

कंप्यूटर बाबा ने कही ये बात

इस मामले में साधू संत भी कूद पड़े हैं. महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा ने कहा कि इस मामले में कई निर्दोष लोगों को भी फंसाया गया है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, ताकि जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. महिलाओं ने जाल बिछाकर कई लोगों को ब्लैकमेल किया है और उन सभी के नाम सार्वजनिक होने चाहिए. वहीं कमलनाथ सरकार मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी.
 

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