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मिलिए देश के उन 9 राजनयिकों से जिन्होंने UNHRC में दी पाकिस्तान को मात

न्यूयॉर्क: जेनेवा में संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) का 42वां सत्र जारी है. यह सत्र 27 सितंबर तक चलेगा यानी इस सत्र का कार्यकाल एक सप्ताह का बचा है. पिछले हफ्ते पाकिस्तान (Pakistan) ने परिषद की बैठक में कश्मीर का राग (Kashmir Issue) अलापा था लेकिन भारत (India) ने इसे अपना आंतरिक मुद्दा बताते हुए पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई थी. भारत की कूटनीतिक जीत के असली हीरो नौ भारतीय राजनयिक थे जिन्होंने अपनी रणनीति की बदौलत पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर मात दी. 

इन नौ भारतीय राजनयिक का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के पूर्वी मामलों की सचिव विजय ठाकुर सिंह (Vijay thakur singh) ने किया था. विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने उन्हें रणनीति बनाने की खास जिम्मेदारी सौंपी थी. वह यूएनएचआरसी की मीटिंग के दौरान खुद जेनेवा में मौजूद थीं. विजय ठाकुर सिंह ने ही जिनेवा में जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान के झूठ को बेनकाब किया था. भारत के प्रतिनिधिमंडल के अहम सदस्यों में पूर्व भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया, यूएन में भारत के प्रतिनिधि राजीव चंदेर, उप सचिव (यूएन) पुनीत अग्रवाल, भारत के यूएनएचआरसी में पहले सेक्रेटरी विमर्श आर्यन, अनिमेश चौधरी, भारत की सेकंड सेक्रेटरी कुमाम मिनी देवी, ग्लोरिया गंगटे और आलोक रंजन झा शामिल थे. 

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को करारा जवाब देने वाले विमर्श आर्यन का संबंध जम्मू-कश्मीर से है. वह किश्तवाड़ के रहने वाले हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जिस तरह से उन्हें प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया, वह गौर करने लायक है. जम्मू-कश्मीर के विमर्श आर्यन ने जिस तरह से पाकिस्तान के विदेश मंत्री को जवाब दिया, उसे पूरी दुनिया ने देखा. पूरी दुनिया ने देखा कि जो पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा यूएनएचआरसी में उठा रहा है, उसका जवाब उसी जम्मू-कश्मीर का राजनियिक दे रहा है.

अनिमेश ने भारत के पड़ोसी देशों और लैटिन अमेरिका के देशों से संपर्क किया. वह स्पेनिश भी बोलते हैं. उन्होंने लैटिन अमेरिका के देशों से जो संपर्क किया, वह काफी महत्वपूर्ण रहा. उन्हें यह महत्वपूर्ण असाइनमेंट मिला था, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया.
 

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