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निर्मला के मास्टर स्ट्रोक झूला बाजार, निवशेकों ने कमाएं 5 लाख करोड़ 

नई दिल्ली । घरेलू कॉर्पोरेट जगत और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बड़ी राहत दी। इस राहत के बाद शुक्रवार को शेयर बजार में 'दिवाली' का माहौल हो गया है। कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती और कैपिटल गेन टैक्स सरचार्ज की छूट से खुश हुए शेयर बाजार में निवेशकों ने एक घंटे के भीतर 5 लाख करोड़ बना लिए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी (बीएसई) के डाटा के मुताबिक, वित्तमंत्री की घोषणा के तुरंत बाद बाजार चढ़ने लगा और कुछ ही देर में मार्केट कैपिटलाइजेशन 143.45 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जो गुरुवार को 138.54 लाख करोड़ था। यानी वित्त मंत्री की घोषणा के बाद शेयर बाजार में करीब 5 लाख करोड़ की बढ़त हुई। बीएसई का सेंसेक्स नए रिकॉर्ड बनाता जा रहा है। सेंसेक्स में एक दिन में 1800 से ज्यादा पॉइंट्स की तेजी इससे पहले करीब 10 साल पहले देखी गई थी।वहीं, निफ्टी 50 भी 500 अंक से ज्यादा जोड़कर 11,250 के पार पहुंच गया, 10 सालों में पहली बार का इंट्राडे हाई है। जानकारों का कहना है कि ऐलानों का असर निफ्टी की प्रति शेयर आमदनी पर पड़ेगी। जानकारों ने कहा, 'बैंकिंग, एफएमसीजी , कन्ज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑटो कंपनियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा। 15 प्रतिशत टैक्स की वजह से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ज्यादा आकर्षक होगा। कॉर्पोरेट टैक्स में उस समय में कटौती का ऐलान किया गया है जब दुनिया में ट्रेड वॉर चल रहा है।'
कैपिटल मार्केट में फंड के प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने कहा कि बजट में बढ़ाया गया सरचार्ज इक्विटी शेयरों की बिक्री से हुई आमदनी पर नहीं देना होगा। इस छूट के दायरे में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भी आएंगे जो डेरिवेटिव्स में कारोबार करते हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि कटौती के बाद सेस और सरचार्ज जोड़कर प्रभावी कॉर्पोरेट टैक्स दर 25.75 प्रतिशत हो जाएगी, जो पहले 30 प्रतिशत थी। इसके अलावा मिनिमम ऑल्टरनेटिव टैक्स में भी कटौती की गई है। टैक्स कटौती की इन घोषणाओं से सरकारी खजाने पर 1.45 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा।
जानकारों ने कहा कि सरकार का यह कदम इकॉनमी में निवेश को बूस्ट करेगा और भारत को बिजनस के आकर्षक डेस्टिनेशन के रूप में पेश करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने नई कंपनियों के लिए 15 प्रतिशत के टैक्स का ऐलान कर उनके लिए रेड कार्पेट बिछा दिया है। यह कदम अरबों डॉलर के विदेशी निवेश को बढ़ावा देगा। 
वित्तमंत्री की घोषणा के बाद रुपया 66 पैसे उछला
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की आर्थिक वृद्धि एवं निवेश को गति देने की घोषणाओं के बाद रुपया कारोबार के दौरान 66 पैसे उछलकर 70.68 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। वित्त मंत्री ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को राहत देने सहित कॉरपोरेट कर की दरें कम करने की शुक्रवार को घोषणा की। एफपीआई पर डेरिवेटिव सहित प्रतिभूतियों की बिक्री से हुई आय पर बजट में लगाया गया धनाढ्य कर वापस ले लिया गया। साथ ही घरेलू कंपनियों के लिये कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर करीब 10 प्रतिशत घटाकर 25.17 प्रतिशत कर दी गई। इन घोषणाओं के बाद रुपये ने 66 पैसे की बढ़त बनाकर 70.68 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। बृहस्पतिवार को रुपया 71.34 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। घोषणा के बाद सेंसेक्स भी दोपहर करीब 1.26 मिनट पर 1,886 अंक उछल गया।

वित्तमंत्री की घोषणाओं की मुख्य बातें
आयकर अधिनियम में एक नया प्रावधान किया गया है,जो वित्त वर्ष 2019-20 से प्रभावी होगा। इसके बाद घरेलू कंपनी को 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प मिलेगा। हालांकि शर्त होगी कि वे किसी प्रोत्साहन का लाभ नहीं लेने वाले है। 
उपकर और अधिभार सहित इन कंपनियों के लिये प्रभावी दर 25.17 प्रतिशत होगी। साथ ही ऐसी कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर का भुगतान नहीं करना होगा। विनिर्माण क्षेत्र में नया निवेश आकर्षित करने तथा मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने आयकर अधिनियम में एक और नया प्रावधान किया गया है। इससे एक अक्टूबर 2019 या इसके बाद गठित किसी भी कंपनी को विनिर्माण में निवेश करने पर 15 प्रतिशत की दर से आयकर भरने का विकल्प मिलेगा। यह लाभ उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जो कोई अन्य प्रोत्साहन या छूट नहीं लेकर और 31 मार्च 2023 से पहले परिचालन शुरू करेगी। इन कंपनियों के लिये अधिशेष और उपकर समेत प्रभावी कर की दर 17.01 प्रतिशत होगी। साथ ही इन कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर देने की जरूरत नहीं होगी।
सूचीबद्ध कंपनियों को भी राहत दी गई है। इसके तहत जिन सूचीबद्ध कंपनियों ने पांच जुलाई से पहले शेयरों की पुनर्खरीद की घोषणा की है, उन्हें उसके लिये कर नहीं देना होगा। सरकार ने सीएसआर का दायरा भी बढ़ाया है। कंपनियों को अब कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत दो प्रतिशत राशि केंद्र या राज्य सरकार या किसी एजेंसी अथवा सार्वजनिक लोक उपक्रमों द्वारा वित्त पोषित इनक्यूबेशन (पालना केंद्र), विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग या औषधि के क्षेत्र में शोध कर रहे सरकार से वित्त पोषित विश्वविद्यालयों, आईआईटी, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और डीआरडीओ, आईसीएआर जैसे संस्थानों के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त निकायों पर खर्च करने की भी छूट दी गयी है।…इन घोषणाओं से सरकारी खजाने पर 1,45,000 करोड़ रुपये का असर पड़ने का अनुमान है।

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