मध्य प्रदेश

जीव और शिव का एकाकार होना ही मुक्ति का प्रतीक 

इन्दौर । मनुष्य शरीर के सभी अंगों में देवता निवास करते हैं। हम जब देवताओं का स्मरण करते हैं तो शरीर के संबंधित अंगों में भी स्फूर्ति और चेतना आ जाती है। आज मनुष्य तनाव में रहने का अभ्यस्त होता जा रहा है। पुरानी परंपराएं छोड़ी जा रही हैं। त्रिकाल संध्या करना तो दूर, समझते भी नहीं। देश, काल और परिस्थिति के अनुसार तमो गुण, रजो गुण और सतोगुण के आधार पर हमारी क्रियाएं होती हैं। ब्रम्हा, विष्णु और महेश के स्मरण से विवेक की भी प्राप्ति होती है। सत्य और असत्य के बीच का अंतर इनके स्मरण से ही समझ आता है। जीव और शिव का एकाकार होना ही जीवन की मुक्ति का प्रतीक है। शिव अखंड हैं, अनंत हैं, अविभाज्य हैं और अपरिवर्तनीय भी हैं।
ये प्रेरक विचार हैं नमः शिवाय मिशन ट्रस्ट शिवकोठी ओंकारेश्वर के संस्थापक एवं एक रोटी बाबाजी के नाम से प्रख्यात स्वामी शिवोहम भारती महाराज के, जो उन्होंने आज गीता भवन के सत्संग सभागृह में आंखों पर पट्टी बांधकर शिवपुराण की कथा सुनाते हुए व्यक्त किए। उनके सान्निध्य में 24 सितंबर तक सुबह 10 बजे से दिवंगत पितरों के मोक्ष का अनुष्ठान तथा दोपहर 2 से सांय 6.30 बजे तक शिव पुराण कथा का संगीतमय अनुष्ठान चल रहा है। कथा शुभारंभ के पूर्व महेश गुप्ता, दिनेश गुप्ता, मोहन मोदी, अरविंद बागड़ी, दिनेश गुप्ता पंपवाले, नरेश गुप्ता आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। इसके पूर्व सुबह विद्वान आचार्यों के निर्देशन में 150 साधकों ने पितृमोक्ष अनुष्ठान में भाग लिया। इन साधकों को पूजन की सामग्री तथा पितरों को स्थापित करने के लिए सफेद एवं लाल थैलियां समिति की ओर से दी गई हैं। पुरूष पितरों के लिए सफेद एवं महिला पितरों के लिए लाल थैली का प्रावधान रखा गया है। प्रतिदिन इनके परिजन यहां आकर पितरों का शास्त्रोक्त विधि से पूजन-अर्चन कर रहे हैं। गीता भवन में हो रहा यह आयोजन आम नागरिकों के लिए निःशुल्क खुला रहेगा। संध्या को आरती में राम ऐरन, विष्णु बिंदल, हरि अग्रवाल, गजराज मेहता, दिनेश तिवारी, राजेंद्र गर्ग आदि ने भी भाग लिया। संचालन त्रिपुरारीलाल शर्मा ने किया।
शिस्वामी शिवोहम भारती ने कहा कि अखिल ब्रम्हाण्ड में शिव अखंड और आदि तत्व है। शिव में ही सब कुछ समाहित है। शिव से ही शक्ति की उत्पत्ति हुई है। शिव और शक्ति से विष्णु, विष्णु के नाभि कमल से ब्रम्हा और ब्रम्हा के ललाट से शंकर की उत्पत्ति हुई है। इस तरह तीनों आदि देवों की उत्पत्ति शिव तत्व से ही हुई है। हमें कोई भी काम प्रारंभ करने के पूर्व इन तीनों अर्थात ब्रम्हा विष्णु महेश की वंदना आराधना अवश्य करना चाहिए। देवियों में सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा की आराधना सर्वाधिक लाभप्रद होती है। जीवन में जो कुछ विपत्ति आती है, उनका समाधान शिव और शक्ति की आराधना से संभव है।

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