छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में विरोधियों को कानूनी दावपेंच से मात देने की तैयारी में कांग्रेस सरकार!

रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजनीति में जितनी हलचल मची हुई है, कमोबेश उतनी ही हलचल कानूनी गलियारों में भी देखने को मिल रही है. आलम यह है कि नेताओं पर लगातार कस रहे कानून के शिकंजे के कारण विपक्षीय दल बीजेपी (BJP) को भय होने लगा है. क्योंकि प्रदेश में इन दिनों माननीयों पर लगातार कानून का शिकंजा कसते जा रहा है. जिसे सत्तापक्ष कानून का काम तो विपक्ष बदलापुर करार दे रही है. आलम यह है कि राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनमानस में इस बात की चर्चा होने लगी हैं कि अगला नंबर किसका है और अब किस पर कानून का शिकंजा कसेगा.

दरअसल सत्ताधारी दल कांग्रेस (Congress) की ओर से गड़बड़ियों की शिकायत से लेकर बयानों तक पर लगातार एफआईआर (FIR) कराए जा रहे हैं. तो वहीं एक के बाद आरोपियों के भी शपथ पत्रों से भी नित नए खुलासे हो रहे हैं. विपक्षीय दल बीजेपी के प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने का कहना है कि प्रदेश में आपतकाल के हालात हैं. वहीं सत्ता पक्ष के विधायक विकास उपाध्याय का कहना है कि जो गलत किया है, उसके खिलाफ कानून अपना काम कर रहा है. हालांकि इस पूरे घटनाक्रम से चर्चा शुरू हो गई है कि कांग्रेस सरकार अपने विरोधियों को कानूनी दांवपेंच से मात देने की तैयारी कर रही है.
इन नेताओं पर शिकंजे की तैयारी

बता दें कि प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता के खिलाफ अंतागढ़ टेपकांड व डीकेएस घोटाला मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. अंतागढ़ मामले में ही पूर्व मंत्री राजेश मूणत, पूर्व सीएम अजीत जोगी, पूर्व विधायक अमित जोगी को भी आरोपी बनाया गया है. इसके अलावा चिटफंड कंपनी द्वारा ठगी मामले में पूर्व सीएम डॉ. रमन के बेटे अभिषेक सिंह, पूर्व सांसद मधुसूदन यादव, बीजेपी नेता नरेश डकालिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

इसलिए उठ रहे सवाल
कानून के कार्यप्रणाली को लेकर इस लिए भी उंगली उठ रही है. क्योंकि बीते दिनों जोगी पिता-पुत्र सहित अंतागढ़ टेपकांड, नान घोटालों से जुड़े तथाकथिक कई नए तथ्य सामने आए हैं, जिसके बाद कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. जिसे बीजेपी बदलापुर करार देते हुए सरकार की मानसिकता को कटघरे में खड़ा कर रही है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक का कहना है कि कांग्रेस सरकार बदलापुर की राजनीति के तहत काम कर रही है. तो वहीं खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इसे महज कानूनी कार्रवाई ही करार दे रहे हैं.
 

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