मध्य प्रदेश

राजधानी की सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सड़कों में इन दिनों बड़े बड़े गड्ढे बन गए हैं। लगता ही नहीं कि यहां पर सड़क भी थी एक ही बारिश में सड़कों का डामर गायब हो गया वाहन निकलते हैं। तो वाहन के साथ गिट्टी भी सड़कों से निकल निकल कर गड्ढे कर रही है। राजधानी की किसी भी सड़क से निकले सब में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।
अमेरिका जैसी सड़कें
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमेरिका यात्रा के दौरान कहा था कि अमेरिका से अच्छी सड़कें मध्य प्रदेश की हैं। किंतु सड़कों को जिस तरह घटिया डामर तथा बिना बेस के जो सरके तैयार की गई वह साल 6 महीने से ज्यादा नहीं चलती हैं। हर साल इसमें हल्के डामर की कोटिंग करके हर साल भारी भ्रष्टाचार सड़क निर्माण में हो रहा था इस बारिश ने सड़कों के निर्माण के भ्रष्टाचार की परतों को पूरी तरह गड्ढों में तब्दील कर दिया है।
एक ही सड़क को बनाते हैं कई ठेकेदार
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोक निर्माण विभाग सीपीए और नगर निगम द्वारा सड़कों का काम किया जाता है। एक ही सड़क को तीनों विभागों के ठेकेदार समय-समय पर निर्माण बताकर भारी घोटाले कर रहे हैं। कौन सी सड़क किस विभाग द्वारा तैयार की गई है। और किस ठेकेदार ने तैयार की है। इसका कोई सूचना फलक नहीं लगाया जाता है। जिसके कारण एक ही सड़क का निर्माण एक साल में ही 33 विभाग करके करोड़ों रुपए का घोटाला हर साल करते हैं।
सूचना फलक अनिवार्य किया जाए
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सड़कों फुटपाथ और पार्कों के रखरखाव और निर्माण की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों को दी जाए तथा उसमें जिस विभाग की जिम्मेदारी है। वहीं विभाग काम करें और जो काम किया गया है। उसमें ठेकेदार का नाम जो काम किया है। उसका वर्ष और उसकी गारंटी की अवधि यदि सूचना फलक में प्रदर्शित होने लगे तो हर माह जो करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार और घोटाले हो रहे हैं। उन पर रोक लगाई जा सकती हैं।
20 से शुरू होगा पेंच वर्क
सड़कों पर जो गड्ढे ही गड्ढे दिख रहे हैं। उनको भरने का काम 20 सितंबर से शुरू करने की बात निर्माण एजेंसी आ कर रहे हैं। अभी सड़कों की जिस तरह की हालत है। उनमें कई सर को तो इतनी खराब हालत में पहुंच गए हैं कि उनमें लगातार एक्सीडेंट हो रहे हैं। वाहन चालक सड़कों पर गिरकर रोज घायल हो रहे हैं। यदि सड़कों का निर्माण और गड्ढे भरने का काम जल्दी शुरू नहीं हुआ तो इसमें भारी जन रोष फैलने की संभावनाएं भी बनने लगे हैं।

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