मध्य प्रदेश

माया और मोह के बंधन से मुक्ति दिलाती है भागवत : आचार्य ऋषभदेव 

इन्दौर । संसार में रहने वाला मनुष्य माया और मोह के बंधन से ग्रस्त रहता है। माया ही मनुष्य को भक्ति से विमुख करती है। भागवत कथा का श्रवण ऐसे तमाम बंधनों से मुक्ति दिलाता है। माया के चक्रव्यूह से देवता भी नहीं बच सकते। ब्रम्हा, विष्णु भी माया के प्रपंच में फंस चुके हैं। भागवत भूलोक के समस्त जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने वाला महाग्रंथ है। जीवन को मैं और मेरा की माया से मुक्ति दिलाने के लिए भागवत का आश्रय जरूरी है। भक्ति में लगन, निष्ठा और समर्पण का भाव जरूरी है।
बड़ा गणपति, पीलियाखाल स्थित प्राचीन हंसदास मठ पर चल रहे भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह में वृंदावन के भागवताचार्य पं. ऋषभदेव महाराज ने आज भक्त प्रहलाद एवं धु्रव चरित्र प्रसंगों की व्याख्या के दौरान उक्त बाते कही। यह कथा 21 सितंबर तक प्रतिदिन दोपहर 3 से 6 बजे तक होगी। प्रारंभ में हंसपीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी रामचरणदास महाराज के सान्निध्य में पं. पवन शर्मा, संजय मिश्रा, पिंटू शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, कैलाश गोवला आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। संध्या को आरती में सैकड़ो भक्तों ने भाग लिया। बुधवार 18 सितंबर को कृष्ण जन्मोत्सव, 19 को बाल लीला एवं 56 भोग, 20 को रूक्मणी विवाह, 21 को सुदामा चरित्र के साथ कथा का समापन होगा।
पं. ऋषभदेव ने कहा कि दुनिया के सारे विवादों की जड़ मैं और मेरा ही है। माया ऐसी जादूगर है जो मनुष्य को अपने परम लक्ष्य से भटकाकर संसार के लोभ-मोह में उलझाए रखती है। बालक ध्रुव और भक्त प्रहलाद की भक्ति में कोई छल प्रपंच नहीं था। माया का पर्दा और खेल हर कोई नहीं समझ सकता। माया में ही वह शक्ति जो सारे जग को नचा सकती है लेकिन भागवत एकमात्र ऐसा माध्यम है जो माया के बंधनों से मुक्ति दिला सकता है। भागवत ऐसे अनेक मंत्रों का महासागर है जिनसे हम अपने व्यवहारिक जीवन को संवार सकते हैं।  

Tags

Related Articles

Close