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मप्र / मौसम विभाग का दावा- भोपाल में आ चुका है मानसून

भोपाल। खबर चौंकाने वाली है। मानसून ने भोपाल में दस्तक दे दी है। भोपाल सहित आसपास के जिलों में दो दिन से हो रही बारिश को मौसम विभाग प्री-मानसून बता रहा था उसे अब मानसूनी बारिश मान लिया है। इसी के साथ स्थानीय मौसम विभाग ने राजधानी में मानसून आने की घोषणा कर दी।
बुधवार रात तक स्थानीय मौसम केंद्र के वैज्ञानिक इसी बात का दावा कर रहे थे कि बंगाल की खाड़ी और दक्षिण मानसून के दोनों सिस्टम कमजोर पड़ गए हैं। इसलिए अब 30 जून के बाद ही भोपाल सहित बाकी प्रदेश में मानसूनी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने ये भी कहा थी कि बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बन रहा है। भोपाल सहित प्रदेश के अन्य जिलों बुधवार और गुरुवार को हुई बारिश को मौसम विभाग ने प्री-मानसून बारिश बताते हुए ये भी कहा था की ये गर्मी और उमस के कारण लोकल सिस्टम बना था बारिश उसी वजह से हुई है।

मानसून आने की घोषणा: गुरुवार दोपहर मौसम विभाग के वैज्ञानिको ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा प्रदेश के इंदौर, भोपाल, जबलपुर और मंडला से होकर गुजर रही है। बीते दो दिन से इन स्थानों पर बारिश हो रही है। और मौसम विभाग जिन आंकड़ों को देख मानसून की घोषणा करता है बुधवार को बारिश उसी अनुपात में हुई है। गुरुवार को भोपाल में 20 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई। इसने जिले के 80 फीसदी से ज्यादा एरिया कवर किया। इसके बाद मौसम विभाग ने मानसून आने की घोषणा कर दी। ऐसे जानें आपके शहर में मानसून आ गया है?

मौसम विभाग दो तरीके से मानसून की भविष्यवाणी करता है। एक, अप्रैल में जब केवल अंदाजा लगाया जाता है कि इस साल मानसून कैसा रहेगा। दूसरा, जून के मध्य में। इसमें रिजन वाइज मानसून की भविष्यवाणी की जाती है। इससे यह लगभग तय होता है कि किस रिजन में या किस शहर में मानसून कब पहुंचेगा। उस निर्धारित तारीख के आसपास जब हवा में नमी आने लगे, शहर या आसपास के 6 से 7 लोकेशन में दो से तीन दिन तक बारिश हो तो फिर स्थानीय अधिकारी मानसून की घोषणा करते हैं।

कैसे पता करते हैं कि मानसून आ गया है?

इसके लिए तीन पैरामीटर होते हैं :

बारिश : भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने तटीय इलाकों में 14 लोकेशन तय कर रखी हैं। इनमें 11 केरल (तिरुवनंतपुरुम, पुनलुर, कोल्लम, अलप्पूझा, कोट्यम, त्रिशूर, कोचि, कोझीकोड, थियासरी, कन्नुर और कुडूलू ), 2 लक्षद्वीप (मिनी कॉय और अमिनी दिवी) और एक कर्नाटक (मेंगलौर) में हैं। इन 14 लोकेशनों के कम से कम 60 फीसदी लोकेशनों पर (यानी कम से 9 लोकेशनों) पर लगातार दो दिन तक कम से कम 2.5 ML बारिश होनी चाहिए।
हवा : इन क्षेत्रों में हवा दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहने लगे और उसकी गति 25 से 30 किमी प्रति घंटा हो।
रेडिएशन : मौसम विज्ञान की भाषा में इसे OLR यानी आउटगोइंग लांगवेव रेडिएशन कहते हैं। इसकी मात्रा इन स्पेसिफिक लोकेशन में 200 वॉट स्क्वेअर मीटर से कम होनी चाहिए। इसका मतलब यह होता है कि जमीन के ऊपर बादल बनने शुरू हो गए हैं और उसके सूरज से आने वाले रेडिएशन को रोकना शुरू कर दिया है।

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